सन्डे के दिन कामवाली की जमकर ठुकाई


दिनेश अंकल पड़ोसी है हमारे और भरूच से है. लेकिन अपनी जॉब की वजह से वो यहाँ राजकोट में रहते है. वो एक बड़ी मशीनरी बनाने वाली कंपनी में मेनेजर है. उनका सेलरी वगेरह बहुत अच्छा है. और उनकी कंपनी वालो ने ही उन्हें टू बीएचके फ्लेट रहने के लिए दिया हुआ है. पिछले साल तक तो वो अपनी बीवी बच्चो को भी यही पर ले के रहते थे. लेकिन फिर उनके भाई लोग घर पर कब्जा जमा लेंगे भरूच में ये डर लगने पर उनहोंने फेमली को वापस भेज दिया भरूच में. और वो अब एक साल से अकेले ही रहते है. अब 40 साल के आदमी के क्या अरमान नहीं होते है. लंड तो उसके पास भी होता है जो खड़ा होता है और चूत मांगता है! पहले दो तिन महीने उनकी तरफ से कोई हलचल नहीं हुई. लेकिन फिर वो अक्सर जवान लड़कियों को ले के अपने फ्लेट पर आते थे. और जब सोसायटी के सेक्रेटरी को ये बात पता चली तो उन्होंने दिनेश अंकल को ये सब के लिए मना कर दिया. दिनेश अंकल ने कहा अरे वो मेरी कम्पनी की लडकियां है भाई आप लोग ऐसे घटिया कैसे सोच सकते हो! लेकिन सब को वो लड़की की वेशभूषा और चाल चलन से पता ही था की वो राजकोट रेलवे स्टेशन के पास की कुछ चुनिन्दा होटल की कॉलगर्ल्स ही है!

दिनेश अंकल का जुगाड़ बिगाड़ दिया सोसायटी वालो ने! लेकिन खड़ा लंड अच्छे अच्छे आइडिया देता है दिमाग को. दिनेश अंकल ने कुछ दिनों में ही अपने घर पर एक कामवाली लगा दी. वो एक मोटी 30- 32 साल की भाभी थी. और वोपुरे बिल्डिंग में सिर्फ दिनेश अंकल का ही काम करती थी. और उनके घर में काम होगा भी क्या. एक आदमी के कपडे धोने, खाना बनाना और सफाई करनी. वो भाभी का बदन गदराया हुआ था और उसकी बॉडी के अंग अंग में सेक्स था आप ऐसा कह सकते हो. वो करीब 11 बजे डेली आती थी. और सप्ताह भर तो अंकल जी ऑफिस में होते थे. लेकिन संडे यानी रविवार को वो अंकल की हाजरी में घर में होती थी. मेरा मन बार बार कहता था की ये ठरकी अंकल जरुर संडे को सेक्स डे मनाता होता इस हॉट कामवाली के साथ! अब मुझे भी इस कामवाली में इंटरेस्ट आने लगा था. और मैं सच में जानना चाहता था की क्या वो सच में उसको चोदते है. दिनेश अंकल के घर की एक चाबी हमारे यहाँ रहती थी. और मैंने मम्मी की नजर से बच के एक दोपहर को वो चाबी निकाल ली अलमारी से. फिर दोपहर को जब मम्मी सोयी हुई थी तो मैं चुपके से दिनेश अंकल के घर को खोल के वहां गया. वैसे मैं काफी बार घुसा था उनके घर में. मैंने देखा की बेडरूम के एक कौने में एक जगह थी जहा पर मैं छिप के अंकल और उसकी कामवाली का काण्ड देख सकता था. और मुझे तो बस यही जानना था की वो दोनों सेक्स करते है या नहीं! लेकिन पूरा दिन तो मैं छिप के नहीं बैठ सकता था वहां पर.

मैंने फिर मार्केट जा के चाबीवाले भैया से उस चाबी की डुप्लीकेट बनवा ली. और ओरिजिनल चाबी को मैंने वापस अलमारी में रख दिया. सन्डे को प्रोग्राम बनता होगा यही मुझे यकीन था. शनिवार को मैं वापस अंकल के घर में घुसा दोपहर में. और मैंने छानबीन की तो मेरे को एक जगह मिल ही गई जहा से मैं अंकल के घर में घुस सकता था. दरअसल हमारी दोनों की गेलरी बहार को खुलती थी. और वहां पर विंडो थे. मैने अंकल के विंडो की स्टॉपर को एकदम एंड में ला के रोक दिया. ऐसी अटकाई थी की बहार से धक्का देने पर वो खुल जाए. और फिर मैं सन्डे को सब की नजर बचा के हमारी गेलरी में गया और फिर अंकल की साइड पर जा के स्टॉपर को पुश किया. स्टॉपर हट गई. मेरा दिल जोर जोर से धडक रहा था. मैं चोर के जैसे पडोसी के घर में घुस जो रहा था. मैंने विंडो को पुश कर के देखा तो उस कमरे में कोई नहीं था. मैंने फलांग लगाईं और अंदर धीरे से जा पड़ा. थोड़ी आवाज हुई लेकिन तब अंकल वहां नहीं होंगे इसलिए उन्होंने सुना नहीं!

मैंने हलके से दरवाजे की आड़ से देखा तो अंकल शायद टॉयलेट में थे. मेरे को यही सही मौका लगा. मैं चुपके से उनके बेडरूम में गया. और जो छिपने की जगह थी वहां जा के छिप गया. वो जगह दरअसल बहुत सब अनयुजड़ रजाई और गद्दों का ढेर था. शायद आंटी और बच्चों के जाने के बाद वो वही पड़ी हुई थी तहा के. मैंने अपने ऊपर रजाई डाल ली और एक कौने से मेरी एक आँख को ही बहार का सिन दिख सके ऐसा पोज ले लिया. वो पलंग से दूर थी इसलिए कोई उतना टेंशन नहीं था मेरे को. करीब 10 मिनिट के बाद अंकल नंगे ही कमरे में आये. वो टॉयलेट से हो के आये थे. उनके आगे लंड मुरझाया हुआ था और लटका हुआ था. वो लंड काफी लम्बा था वैसे. फिर उन्होंने फोन निकाला और कामवाली को कॉल किया. और वो बोले, अरे जल्दी आ ना तेरे को बोला तो है की रविवार को तेरे को जितना जल्दी हो काम पर आना है. और फिर वो पलंग के ऊपर बैठ के एक पोर्न मेगेजिन के पन्ने फेरने लगे. मैंने देखा की मेगेजिन में लड़कियों की चूत औत गांड चुदाई के फोटो देख के उनका लंड खड़ा होने लगा था. और बिच बिच में अंकल जी अपने लंड पर हाथ भी फेरते थे. उनका लंड आधा खड़ा हुआ था और उतने में डोर खुलने की आवाज आई.

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